वतन की सोंधी मिट्टी की बात निराली है, कतरे- कतरे से खुशबू वफ़ा की आती है। वतन की सोंधी मिट्टी की बात निराली है, कतरे- कतरे से खुशबू वफ़ा की आती है।
फटाफट काम करे, या फिर सब्र से सोच समझ कर। या फिर माने दास मलूका की, और रहें चुपचाप जैसे पंछी और अ... फटाफट काम करे, या फिर सब्र से सोच समझ कर। या फिर माने दास मलूका की, और रहें च...
जो अपनी बहन के अपमान के लिए लड़ ले भगवान से मैं हूँ भक्त उस रावण का जो अपनी बहन के अपमान के लिए लड़ ले भगवान से मैं हूँ भक्त उस रावण का
शत्रु के रक्त से कर विजय अभिमान का दिया उपहार शत्रु के रक्त से कर विजय अभिमान का दिया उपहार
और कोलाहल ? और कोलाहल ?
और फिर... और फिर...